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<title>www.ujjwalpradesh.in</title>
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<title><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा, ट्रेड घाटा घटाने और आर्थिक सहयोग पर होगी चर्चा]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/south-african-business-delegation-visits-india-discussions-to-focus-on-reducing-trade-deficit-and-economic-cooperation-0001518626/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:43:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[नई दिल्ली
&nbsp;भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_114.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहा है. यह प्रतिनिधिमंडल 10 और 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल (BRICS Business Council) और बिजनेस फोरम की बैठकों में हिस्सा लेगा. यह महत्वपूर्ण दौरा आगामी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करना और नए निवेश अवसरों की तलाश करना है।&nbsp;</p>

<p><strong>व्यापार असंतुलन को पाटने पर मुख्य ध्यान</strong><br />
इस दौरे का नेतृत्व &#39;साउथ अफ्रीकन ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल&#39; (SABBC) की चेयरपर्सन बुसी माबुजा कर रही हैं. वर्तमान में दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापार अंतर है. साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका को भारत के साथ व्यापार में लगभग 3.18 अरब डॉलर (USD 3.18 billion) का व्यापार घाटा उठाना पड़ा था।&nbsp;</p>

<p>फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका से भारत को मुख्य रूप से कोयला, मैंगनीज और केमिकल वुड पल्प जैसी कच्ची रॉ मैटेरियल का निर्यात किया जाता है. वहीं, भारत से दक्षिण अफ्रीका को पेट्रोलियम उत्पाद, गाड़ियां, दवाइयां और मशीनरी भेजी जाती है. दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल इस बार पारंपरिक &#39;क्रेता-विक्रेता&#39; मॉडल को बदलकर सह-निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर देगा, ताकि वे भारत को ऊंचे मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों का निर्यात कर सकें।&nbsp;</p>

<p><strong>इन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस</strong></p>

<p><strong>दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों में कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर चर्चा की जाएगी</strong></p>

<p><strong>&nbsp; &nbsp; ऑटोमोटिव हब: </strong>भारतीय तकनीक और पूंजी का उपयोग करके दक्षिण अफ्रीका को एक क्षेत्रीय ऑटोमोटिव उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना।&nbsp;<br />
<strong>&nbsp; &nbsp; फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य: </strong>दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी करना, ताकि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सके।&nbsp;<br />
<strong>&nbsp; &nbsp; अत्याधुनिक तकनीक और कौशल विकास:</strong> सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्किल-एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करना।&nbsp;<br />
<strong>&nbsp; &nbsp; हरित ऊर्जा</strong>: रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम स्थापित करना।&nbsp;<br />
<strong>&nbsp; &nbsp; कृषि और पैकेजिंग: </strong>भारतीय बाजार में दक्षिण अफ्रीकी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना और भारत की आधुनिक फूड प्रोसेसिंग व पैकेजिंग तकनीक को अपनाना।&nbsp;</p>

<p><strong>&#39;अफ्रीकी मुक्त व्यापार&#39; और ब्रिक्स बैंक की भूमिका</strong><br />
SABBC की चेयरपर्सन बुसी माबुजा के अनुसार, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA) भारतीय कंपनियों के लिए पूरे अफ्रीका के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश करने का एक शानदार अवसर है. इसके अलावा, ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने दक्षिण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए 6.41 अरब रैंड से अधिक की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है, जिससे व्यापारिक साझेदारी को मजबूत आधार मिलेगा।&nbsp;</p>
]]></content>
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<title><![CDATA[ ग्राम पंचायतों की जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त, हाईकोर्ट बोला- बेदखली आदेश के लिए लंबी प्रक्रिया जरूरी नहीं]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/gram-panchayat-land-to-be-freed-from-encroachment-high-court-states-that-a-lengthy-process-is-not-required-for-eviction-orders-0001518684/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:32:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[मध्य प्रदेश ]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[लखनऊ

ग्राम पंचायत की जमीनों से अतिक्रमण को हटाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_207.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong></p>

<p>ग्राम पंचायत की जमीनों से अतिक्रमण को हटाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू करने के लिए लंबी और पेचीदा प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की है।</p>

<p>न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने पूजा देवी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दीया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रावधान से ही स्पष्ट है कि धारा 67(3) के तहत अतिक्रमणकारी को बेदखल करने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग भी किया जा सकता है तथा निर्धारित प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।</p>

<p><strong>वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा</strong><br />
कोर्ट ने आगे कहा कि राजस्व संहिता, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों में अतिक्रमण हटाने तथा आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया निर्धारित है। लिहाजा धारा 67 की कार्यवाही के बाद उसके अनुपालन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की विस्तृत और लंबी प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा सकता। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि धारा 67(3) और अध्याय 12 में अतिक्रमण हटाने तथा प्रतिकर की वसूली के लिए पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध है। इस कारण धारा 67 के आदेश को प्रभावी करने के लिए निष्पादन कार्यवाही को अनावश्यक रूप से जटिल या दीर्घकालिक नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को राजस्व न्यायालय मैनुअल के पैरा 460 की समीक्षा कर उसे वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा है।</p>

<p><strong>हाईकोर्ट ने जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का दिया आदेश</strong><br />
वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश लोकेश कुमार खुराना की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। पिछले आदेश के अनुपालन में, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा यू. कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुईं।</p>
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<title><![CDATA[दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना? बोलीं- फैसला मेरा होगा, भारत से प्रत्यर्पण का सवाल अलग]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/will-sheikh-hasina-return-to-bangladesh-in-december-she-stated-the-decision-will-be-mine-the-question-of-extradition-from-india-is-a-separate-matter-0001518660/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:22:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[विदेश]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[नई दिल्ली

भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_165.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>

<p>भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है।</p>

<p>न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, &#39;मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।&#39;</p>

<p><strong>फांसी की सजा मानने से इनकार</strong><br />
उन्होंने कहा, &#39;राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।&#39;</p>

<p>उन्होंने कहा, &#39;जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।&#39;</p>

<p><strong>न्याय का मतलब सजा नहीं</strong><br />
उन्होंने कहा, &#39;मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।&#39; उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, &#39;अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।&#39;</p>

<p><strong>क्या भारत भेज रहा है वापस</strong><br />
जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, &#39;भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।&#39; उन्होंने कहा, &#39;मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।&#39;</p>

<p>अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, &#39;मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।&#39;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/will-sheikh-hasina-return-to-bangladesh-in-december-she-stated-the-decision-will-be-mine-the-question-of-extradition-from-india-is-a-separate-matter-0001518660/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[हड्डी एवं जोड़ रोग के डॉ. दीपक चांदिल निलंबित, अनुशासनहीनता, लापरवाही एवं लेन-देन की शिकायतों पर कार्रवाई]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/orthopedic-surgeon-dr-deepak-chandil-suspended-action-taken-over-complaints-of-indiscipline-negligence-and-financial-irregularities-0001518745/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:21:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[राज्य]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[हड्डी एवं जोड़ रोग के डॉ. दीपक चांदिल निलंबित, अनुशासनहीनता, लापरवाही एवं लेन-देन की शिकायतों पर कार्रवाई
मुरैना
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, चंबल संभाग द्वारा...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/nilmbit_suspended_3_1.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>हड्डी एवं जोड़ रोग के डॉ. दीपक चांदिल निलंबित, अनुशासनहीनता, लापरवाही एवं लेन-देन की शिकायतों पर कार्रवाई<br />
मुरैना</strong><br />
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, चंबल संभाग द्वारा जिला चिकित्सालय, मुरैना में पदस्थ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक चांदिल को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।<br />
कलेक्टर&nbsp; ने अवगत कराया है कि सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा अपनी ड्यूटी पर अनुपस्थित रहना, एम.एल.सी. रिपोर्ट समय से नहीं भेजना, विकलांग बोर्ड में पूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण किए बिना ही विकलांग प्रमाण-पत्र के लिए अपात्र घोषित करना तथा आए दिन सी.एम. हेल्पलाइन के अंतर्गत शिकायतें प्राप्त होना पाया गया है। इनमें ज्यादातर शिकायतें चिकित्सकीय कार्य में लापरवाही एवं पैसे के लेन-देन से संबंधित हैं।<br />
डॉ. चांदिल को कार्यप्रणाली में सुधार हेतु कार्यालय, जिला चिकित्सालय, मुरैना से कई बार कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए, किन्तु इनके द्वारा कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया गया। इनके विरुद्ध सी.एम. हेल्पलाइन में की गई शिकायतों के संबंध में भी कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए तथा क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, ग्वालियर द्वारा भी कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए। दिनांक 15 जून 2026, 27 जून 2026 एवं 19 जून 2026 को जारी कारण बताओ सूचना-पत्रों का भी इनके द्वारा समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके पश्चात भी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया गया।<br />
सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा पूर्व में भी कई बार अनुपस्थित रहने पर नोटिस दिए जाने के पश्चात भी कोई सुधार नहीं किए जाने के कारण इनके विरुद्ध कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था। उक्त कारणों से कार्यालय कलेक्टर, जिला मुरैना द्वारा दिनांक 09 फरवरी 2023 को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था, जिसके क्रम में डॉ. चांदिल द्वारा प्रस्तुत जवाब पूर्णतः समाधानकारक न पाए जाने से भविष्य में पुनरावृत्ति न किए जाने की चेतावनी देते हुए जारी कारण बताओ सूचना-पत्र नस्तीबद्ध किया गया था।<br />
सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा दिनांक 13 मार्च 2023 को पुनः प्रतिवेदित किया गया कि डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ की ड्यूटी दिनांक 13 मार्च 2023 को माननीय राज्यपाल महोदय के आगमन के दौरान कारकेड में लगाई गई थी। इसके अनुक्रम में दिनांक 11 मार्च 2023 को उनके ओ.पी.डी. कक्ष में बैठकर मरीजों को देखने के दौरान डॉ. चांदिल द्वारा मरीजों के सामने जूता मारने एवं गाली-गलौज करते हुए अभद्रता की गई, जिसके क्रम में डॉ. चांदिल के विरुद्ध सख्त कार्यवाही किए जाने का निवेदन किया गया था।<br />
सिविल सर्जन द्वारा अपने प्रतिवेदन के साथ उक्त घटना के संबंध में की गई शिकायत में अन्य चिकित्सकों, वार्ड बॉय तथा अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी लिए गए। जिसमें डॉ. आशीष अग्रवाल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, डॉ. अनुराग तोमर, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं डॉ. राघवेन्द्र यादव, मेडिकल विशेषज्ञ के कथन लिए जाने पर उनके द्वारा अपने कथनों में सिविल सर्जन द्वारा की गई शिकायत को सही बताया गया और शिकायती आवेदन पर अपने हस्ताक्षर होना भी स्वीकार किया गया।<br />
उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा उक्त कृत्य पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं असंवेदनशीलता का द्योतक होकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-5 के उपनियम (1), (2), (3) के विपरीत है। जिसके लिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत डॉ. चांदिल को निलंबित किए जाने की अनुशंसा का प्रस्ताव कलेक्टर&nbsp; द्वारा आयुक्त, चंबल संभाग को प्रेषित किया गया।<br />
कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के आधार पर आयुक्त, चंबल संभाग ने डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।<br />
निलंबन अवधि में डॉ. चांदिल का मुख्यालय कार्यालय, सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना रहेगा तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।</p>
]]></content>
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</item>
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<title><![CDATA[ शहडोल में किरायेदारों से होटल गेस्ट तक सबका होगा सत्यापन, 15 दिन से ज्यादा ठहरने पर सूचना जरूरी]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/in-shahdol-everyone—from-tenants-to-hotel-guests—will-undergo-verification-notification-is-mandatory-for-stays-exceeding-15-days-0001518623/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:11:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[विदेश]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[शहडोल&nbsp;

शहडोल में 15 दिनों से ज्यादा रुकने वालों पर पुलिस की खास निगरानी होगी. कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और जन सामान्य के हित की...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_112.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>शहडोल&nbsp;</strong></p>

<p>शहडोल में 15 दिनों से ज्यादा रुकने वालों पर पुलिस की खास निगरानी होगी. कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और जन सामान्य के हित की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं. इस आदेश के तहत 15 दिन से अधिक ठहरने वाले व्यक्तियों को थाने में अपनी सूचना देनी होगी और अगर इस नियम का उल्लंघन किया गया, तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।&nbsp;</p>

<p><strong>ऐसे लोगों को थाने में देनी होगी सूचना</strong><br />
कलेक्टर के आदेश अनुसार, &#39;&#39; किरायेदारों व पेइंग गेस्ट की सूचना संबंधित मकान व दुकान मालिक द्वारा विहित प्रारूप में संबंधित थाने पर दिया जाना अनिवार्य होगा. सूचना देने के पूर्व मकान अथवा दुकान किराए पर नहीं दी जाएगी. किरायेदार व पेइंग गेस्ट से आईडी प्रूफ और मोबाइल नंबर भी आवश्यक रूप से लिया जाना होगा. इसी प्रकार घरेलू कामगारों एवं व्यावसायिक कर्मचारियों की जानकारी संबंधित मालिक द्वारा थाने पर सूचना देने के उपरांत ही उन्हें कार्य पर रखा जाएगा।&nbsp;</p>

<p>आदेश में कलेक्टर ने आगे कहा, &#39;&#39; घरेलू कामगारों के आईडी प्रूफ व मोबाइल नंबर भी आवश्यक रूप से लिए जाएंगे. निजी छात्रावासों में रह रहे छात्र-छात्राओं की सूचना भी तय फॉर्मेट में संबंधित थाने को देनी होगी, और उनका आईडी प्रूफ एवं मोबाइल नंबर लिया जाना आवश्यक होगा।&nbsp;</p>

<p><strong>होटल से लेकर धर्मशालाओं तक को निर्देश</strong><br />
होटल, लॉज, धर्मशाला, रैन बसेरा व सभी धार्मिक स्थलों में रुकने वाले व्यक्तियों से पहचान पत्र और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिए जाएंगे. ठहरने वाले व्यक्तियों की सूची आईडी प्रूफ सहित विहित प्रारूप में प्रतिदिन संबंधित थाने पर दी जाएगी. इसके अलावा भवन निर्माण और अन्य निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों एवं कारीगरों की जानकारी ठेकेदार द्वारा विहित प्रारूप में थाने पर देने के बाद ही उन्हें काम पर रखा जाएगा. इसके अतिरिक्त पुलिस द्वारा प्रारंभ किए गए अतिथि पोर्टल पर भी रुकने वाले व्यक्तियों की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।&nbsp;</p>

<p><strong>डिलीवरी एजेंट्स के लिए भी निर्देश</strong><br />
कलेक्टर के आदेश के मुताबिक ऑनलाइन शॉपिंग व होम डिलीवरी एजेंट, स्पा सेंटर, मसाज सेंटर व ब्यूटी पार्लर के कर्मचारियों की जानकारी भी तय प्रारूप में थाने पर देनी होगी और उनके आईडी प्रूफ व मोबाइल नंबर भी लिए जाएंगे. इसी प्रकार निजी सुरक्षा एजेंसी के लिए नियुक्त गार्ड या स्वयं के स्तर पर नियुक्त किए गए गार्ड की जानकारी भी संबंधित थाने पर देनी होगी. विदेशी व्यक्तियों के संबंध में तत्काल सूचना एफआरआरओ शाखा, शहडोल को देना अनिवार्य होगा।&nbsp;</p>

<p>कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा, &#39;&#39; नियमों के किसी भी अंश का उल्लंघन करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दंडनीय होगा।&nbsp;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/in-shahdol-everyone—from-tenants-to-hotel-guests—will-undergo-verification-notification-is-mandatory-for-stays-exceeding-15-days-0001518623/</guid>
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<item>
<title><![CDATA[दो दशक से पंजाब की राजनीति में नशे का दबदबा, सरकारें बदलीं लेकिन समस्या बरकरार; 2027 में फिर होगी परीक्षा]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/the-drug-issue-has-dominated-punjabs-political-landscape-for-two-decades-despite-changes-in-government-the-problem-persists—and-will-face-the-test-of-public-scrutiny-again-in-2027-0001518587/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:04:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[हॉलीवुड]]></category>
<featured><![CDATA[Yes]]></featured>
<description><![CDATA[चंडीगढ़&nbsp;

पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_53.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़&nbsp;</strong></p>

<p>पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ।</p>

<p>उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है।</p>

<p><strong>अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश</strong><br />
2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई।</p>

<p>इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया।</p>

<p><strong>कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम</strong><br />
2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली।</p>

<p>मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और &lsquo;युद्ध नशे के विरुद्ध&rsquo; अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है।</p>

<p><strong>तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच</strong><br />
2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया।</p>

<p>भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह &lsquo;बिट्टू&rsquo; औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं।</p>

<p><strong>नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए</strong><br />
2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया।</p>

<p>2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं।&nbsp;</p>

<p>खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content>
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<title><![CDATA[हरियाणा में गन्ने की खेती होगी आसान, किसानों को नई तकनीकों और मशीनों पर मिलेगी सब्सिडी]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/sugarcane-farming-in-haryana-set-to-become-easier-farmers-to-receive-subsidies-for-new-technologies-and-machinery-0001518612/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:52:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[चंडीगढ़
&nbsp;हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए &#39;गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना&#39; के अंतर्गत किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_92.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़</strong><br />
&nbsp;हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए &#39;गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना&#39; के अंतर्गत किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों&mdash;यमुनानगर, नारायणगढ़, शाहाबाद, करनाल, असंध, भादसों, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, जींद, पलवल, भूना, गोहाना और महम के सहायक गन्ना विकास अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में आने वाले किसानों को अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। विभाग के प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अनुदान राशि गन्ने की अधिसूचित व सिफारिश की गई किस्मों की बिजाई आधुनिक विधियों, जैसे कि &quot;प्रमोशन ऑफ़ वाइड रौ स्पेसिंग (4 फ़ीट)&quot;, सिंगल-बड, बड-चिप विधि, फाउंडेशन सीड नर्सरी/ बीज उपचार, और 4 फीट की चौड़ी पंक्ति दूरी में पेड़ी-प्रबंधन (Ratoon Management) के माध्यम से प्रदर्शन-प्लाट लगाने पर दी जाएगी। प्रवक्ता ने आवेदनों की समय-सीमा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिन किसान भाइयों ने अपना गन्ना वसंत या ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल के बाद) में लगाया है, वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए 30 सितंबर 2026 तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं।</p>

<p>वहीं, जो किसान शरद ऋतु (आगामी अक्टूबर-नवंबर) में गन्ने की बिजाई करने वाले हैं, उनके लिए आवेदन की तिथि 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक किसान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.agriharyana.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।<br />
इसके अलावा, राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए &quot;Mechanization in Sugarcane Implements&quot; योजना के तहत भी विभिन्न कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है।</p>

<p>प्रवक्ता ने आगे बताया कि पावर ऑपरेटेड गन्ना सैट ट्रीटमेंट डिवाइस (30-120 लीटर क्षमता), पावर वीडर (इंजन चालित 5 से 7.5 BHP तक), गन्ना रटून मैनेजर, वाइड-रो रिज/रिज, रोटावेटर (4 फीट), ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर, सब-सोइलर/चिसलर, गन्ना कटर/स्ट्रिपर/प्लांटर और मिनी ट्रैक्टर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ उठाने के लिए भी किसान 30 सितंबर 2026 के बीच कृषि विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।</p>
]]></content>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[ त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/will-sugar-become-cheaper-during-the-festive-season-20-drop-in-ex-mill-prices-retail-rates-likely-to-fall-0001518637/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:41:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[इंदौर&nbsp;

चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_129.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>इंदौर&nbsp;</strong></p>

<p>चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है।</p>

<p>अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये।</p>

<p><strong>कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर</strong><br />
सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।</p>

<p>यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है।</p>

<p><strong>अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी</strong><br />
दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।</p>

<p>सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।</p>

<p>हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।</p>

<p>फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/will-sugar-become-cheaper-during-the-festive-season-20-drop-in-ex-mill-prices-retail-rates-likely-to-fall-0001518637/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[इंदौर मेट्रो की पहली TBM ‘नर्मदा’ लॉन्च, अंडरग्राउंड निर्माण का काम शुरू; जानें क्या है खास तकनीक]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/indore-metro’s-first-tbm-‘narmada’-launched-underground-construction-work-underway-learn-about-the-specialized-technology-involved-0001518628/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:33:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[इंदौर&nbsp;
इंदौर मेट्रो के भूमिगत निर्माण कार्य ने अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भूमिगत सेक्शन के लिए पहली टनल...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_118.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>इंदौर&nbsp;</strong><br />
इंदौर मेट्रो के भूमिगत निर्माण कार्य ने अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भूमिगत सेक्शन के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) &lsquo;नर्मदा&rsquo; को एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया।</p>

<p>TBM की लॉन्चिंग के साथ ही इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। यह काम आधुनिक तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत किया जाएगा।</p>

<p><strong>एमडी ने मौके पर पहुंचकर देखा पूरा काम</strong></p>

<p>TBM &lsquo;नर्मदा&rsquo; की लॉन्चिंग के दौरान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने लॉन्चिंग की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया और इस चुनौतीपूर्ण तकनीकी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली इंजीनियरिंग टीम और मेट्रो अधिकारियों को बधाई दी।</p>

<p><strong>410 टन की मशीन, पहले जमीन पर तैयार की गई</strong><br />
&lsquo;नर्मदा&rsquo; कोई सामान्य मशीन नहीं है। इसका वजन करीब 410 मीट्रिक टन है। इतनी भारी और विशाल TBM को पहले ग्राउंड लेवल पर असेंबल किया गया। इसके बाद विशेष तकनीकी व्यवस्था के जरिए इसे एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट के भीतर उतारा गया।</p>

<p>मशीन को शाफ्ट में सुरक्षित उतारना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। इसके लिए Megalift System और Strand Jack Assembly जैसी विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह सिस्टम 1,000 मीट्रिक टन से अधिक भार उठाने में सक्षम है।</p>

<p><strong>अब एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग</strong><br />
TBM &lsquo;नर्मदा&rsquo; का इस्तेमाल इंदौर मेट्रो के एयरपोर्ट-बड़ा गणपति भूमिगत सेक्शन में सुरंग निर्माण के लिए किया जाएगा। मशीन के जरिए जमीन के भीतर सुरंग बनाने का काम व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेगा।</p>

<p>भूमिगत निर्माण में TBM तकनीक का इस्तेमाल इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे जमीन की सतह पर यातायात और अन्य गतिविधियों को अपेक्षाकृत कम प्रभावित करते हुए बड़े स्तर पर सुरंग निर्माण किया जा सकता है।</p>

<p><strong>अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण के नए चरण की शुरुआत</strong><br />
पहली TBM की सफल लॉन्चिंग के साथ इंदौर मेट्रो परियोजना ने भूमिगत निर्माण के लिहाज से एक अहम पड़ाव पार किया है। अब सुरंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ शहर में मेट्रो के भूमिगत नेटवर्क को आकार मिलने लगेगा।</p>

<p>मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की तकनीकी प्रोजेक्ट में मशीन की असेंबली, शाफ्ट में उतारना और फिर टनल बोरिंग शुरू करना कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया है। &lsquo;नर्मदा&rsquo; की सफल लॉन्चिंग इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/indore-metro’s-first-tbm-‘narmada’-launched-underground-construction-work-underway-learn-about-the-specialized-technology-involved-0001518628/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[NHAI दे रहा ₹1000 का FASTag रिचार्ज, हाईवे पर गंदा टॉयलेट दिखे तो ऐसे करें रिपोर्ट]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/nhai-offers-a-₹1000-fastag-recharge-here-is-how-to-report-a-dirty-toilet-found-on-the-highway-0001518619/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:22:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[नई दिल्ली

हाईवे पर सफर करते हुए बहुत से लोगों की शिकायत टॉयलेट से जुड़ी हुई होती है. सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कई पब्लिक टॉयलेट बनवाए हैं. लेकिन लोगों...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_103.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>

<p>हाईवे पर सफर करते हुए बहुत से लोगों की शिकायत टॉयलेट से जुड़ी हुई होती है. सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कई पब्लिक टॉयलेट बनवाए हैं. लेकिन लोगों की शिकायत वहां सफाई को लेकर होती है. उचित साफ-सफाई ना होने की वजह से लोग हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बने इन टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।&nbsp;</p>

<p>लोगों को होने वाली इस असुविधा को लेकर एनएचएआई (NHAI) ने एक प्लान तैयार किया है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत गंदे टॉयलेट की जानकारी देने पर लोगों को रिवॉर्ड मिलेगा. आइए जानते हैं क्या है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की योजना।&nbsp;</p>

<p><strong>कब शुरू हुई थी ये स्कीम?</strong><br />
ये योजना सितंबर 2025 में लॉन्च हुए क्लिन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज का हिस्सा है. एनएचएआई ने इस योजना को 30 जून 2027 तक के लिए बढ़ा दिया है. कई लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है. उन्होंने एनएचएआई को गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर फास्टैग रिचार्ज कमाया है।&nbsp;</p>

<p>2026 में अब तक 429 कम्यूटर्स ने गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर 1000 रुपये का फास्टैग रिचार्ज हासिल किया है. इस स्कीम का फायदा नेशनल हाईवे पर चलने वाले सभी कम्यूटर्स उठा सकते हैं. उन्हें इसमें हिस्सा लेने के लिए साफ तस्वीर अपलोड करनी होगी. राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप पर जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्प के साथ फोटो को अपलोड करना होगा।&nbsp;</p>

<p><strong>देनी होगी ये जानकारियां</strong><br />
इसके अलावा यूजर्स को अपनी बेसिक जानकारी भी देनी होगी. इसके तहत उन्हें अपना नाम, लोकेशन, व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी फोटो सबमिट करते हुए देनी होगी. फोटो और डेटा को एनालाइज करने के बाद सभी वैध व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से मिली ऐसी जानकारी के लिए उन्हें इंस्टैंट 1000 रुपये का रिवॉर्ड मिलेगा।&nbsp;</p>

<p>ये रिवॉर्ड फास्टैग रिचार्ज के रूप में मिलेगा, जो लिंक व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर वाले अकाउंट में क्रेडिट होगा. पूरे स्कीम के दौरान एक गाड़ी को सिर्फ एक बार ही रिवॉर्ड मिलेगा. ये रिवॉर्ड नॉन-ट्रांसफरेबल होगा और इसे कैश में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।&nbsp;&nbsp;</p>

<p>ऐसे मामले में जहां एक ही फैसिलिटी के लिए कई शिकायतें की गई हो. वहां पर जिसने सबसे पहले शिकायत की होगी, उसे इसका फायदा मिलेगा. ये स्कीम सिर्फ एनएचएआई के तहत आने वाले टॉयलेट फैसिलिटी पर लागू होती है. एनएचएआई ने&nbsp;<br />
इसके बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी दी है।&nbsp;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/nhai-offers-a-₹1000-fastag-recharge-here-is-how-to-report-a-dirty-toilet-found-on-the-highway-0001518619/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[मां बनने वाली महिला कैदियों के लिए राहत, 15 दिन की पैरोल फिर भी जेलों में नहीं पहुंच रही जानकारी]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/relief-for-expectant-female-inmates-15-day-parole-available-yet-information-is-not-reaching-the-prisons-0001518606/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:11:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[धर्म ज्योतिष]]></category>
<featured><![CDATA[No]]></featured>
<description><![CDATA[भोपाल
&nbsp;जेल में बंद गर्भवती महिलाओं के बच्चों को जन्मस्थान के तौर पर जेल की पहचान न मिले, इसके लिए उन्हें प्रसव से पहले 15 दिन की पैरोल लेने की सुविधा...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_82.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br />
&nbsp;जेल में बंद गर्भवती महिलाओं के बच्चों को जन्मस्थान के तौर पर जेल की पहचान न मिले, इसके लिए उन्हें प्रसव से पहले 15 दिन की पैरोल लेने की सुविधा दी गई है। हालांकि, जानकारी के अभाव में कई महिला कैदी इस विकल्प का लाभ नहीं उठा पा रही हैं। जेल प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गर्भवती महिला को जेल परिसर में प्रसव की स्थिति का सामना न करना पड़े।</p>

<p>प्रदेश की जेलों में इस समय 10 गर्भवती महिला कैदी हैं। इनमें दो महिलाएं सजा प्राप्त हैं, जबकि आठ विचाराधीन कैदी हैं। जेल मुख्यालय की ओर से इन सभी की स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है।&nbsp;</p>

<p><strong>सरकारी अस्पताल में ही कराया जा रहा प्रसव</strong><br />
जेल महानिदेशक वरुण कपूर के अनुसार, बड़ी जेलों में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद गर्भवती महिला कैदियों का प्रसव जेल में नहीं कराया जाता। उन्हें प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल या नजदीकी जिला अस्पताल भेजा जाता है। इससे मां और नवजात दोनों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा मिल सके।</p>

<p>अब जेल प्रशासन हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिला कैदियों की पहचान और निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव के दौरान अचानक आपात स्थिति पैदा होने पर भी महिला को जेल में ही प्रसव कराने की नौबत न आए।</p>

<p><strong>जन्म में जेल का उल्लेख नहीं</strong><br />
महिला कैदियों से जन्मे बच्चों के भविष्य पर जेल की पहचान की छाप न पड़े, इसके लिए शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनके जन्म प्रमाण पत्र में जेल का उल्लेख नहीं किया जाएगा। जन्मस्थान के तौर पर संबंधित क्षेत्र या जिस शासकीय अस्पताल में प्रसव हुआ है, उसका नाम दर्ज किया जाएगा।</p>

<p>इसी उद्देश्य से महिला कैदियों को प्रसव के आसपास 15 दिन की पैरोल लेने का विकल्प भी उपलब्ध है। लेकिन पर्याप्त जानकारी न होने के कारण इसका उपयोग सीमित है।</p>

<p>हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक की एक अदालत ने भी एक महिला को प्रसव के लिए जमानत देने के निर्देश देते हुए टिप्पणी की थी कि जेल में बच्चे को जन्म देना किसी महिला के लिए गहरे सदमे से कम नहीं है। ऐसे मामलों ने जेलों में गर्भवती महिला कैदियों के लिए संवेदनशील और मानवीय व्यवस्था की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/relief-for-expectant-female-inmates-15-day-parole-available-yet-information-is-not-reaching-the-prisons-0001518606/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[ मुंबई समेत दक्षिण एशिया के शहरों पर समुद्र का संकट, UN रिपोर्ट में 1.4 करोड़ लोगों के विस्थापन का खतरा]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/coastal-threat-to-south-asian-cities-including-mumbai-un-report-warns-of-potential-displacement-for-14-million-people-0001518672/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:00:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[Yes]]></featured>
<description><![CDATA[मुंबई

क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_188.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong></p>

<p>क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट का है.&nbsp; UN महासचिव की रिपोर्ट में&nbsp; मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले दशकों में इन शहरों के निचले इलाकों को हमेशा के लिए पानी में डूबो (Permanent Inundation) सकता है. हालात अगर इसी दिशा में बढ़ते रहे तो लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग इस खतरे की जद में हैं।&nbsp;</p>

<p><strong>आखिर यह रिपोर्ट है क्या और किसने जारी की?</strong><br />
यह चेतावनी UN महासचिव की रिपोर्ट&quot;Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it&quot; में दी गई है. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा के दस्तावेज़ A/81/74 के रूप में दर्ज है. रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ते समुद्री जलस्तर और उससे पैदा होने वाले खतरों का आकलन किया गया है.रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के घरों और बस्तियों पर पड़ सकता है।&nbsp;</p>

<p><strong>क्या सचमुच डूब सकते हैं मुंबई और कोलकाता?</strong><br />
यहां एक बात समझना जरूरी है. रिपोर्ट यह नहीं कहती कि पूरा मुंबई, पूरा कोलकाता या पूरा ढाका समुद्र में समा जाएगा. लेकिन रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर इन शहरों के निचले इलाकों में Permanent Inundation यानी ऐसा जलभराव पैदा कर सकता है जो अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बना रहे. इसी वजह से लाखों लोगों के घर प्रभावित होने की बात कही गई है.यानी कहानी केवल बाढ़ की नहीं है. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्र लगातार आगे बढ़ता रहा तो कुछ इलाकों में लोगों के लिए रहना मुश्किल हो सकता है।&nbsp;</p>

<p><strong>मुंबई के लिए खतरा दूसरों से ज्यादा क्यों माना जा रहा?</strong><br />
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र किनारे बसे लगभग सभी बड़े शहर खतरे में हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां भी हैं.रिपोर्ट में जमीन धंसने (Land Subsidence), भूजल में खारे पानी के प्रवेश और समुद्री तूफानों से आने वाली ऊंची लहरों का जिक्र किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये सभी कारक समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ जुड़ते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है।&nbsp;</p>

<p>आसान भाषा में समझें तो अगर समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ समुद्र किनारे की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा. खारा पानी पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंच सकता है, कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है और समुद्री तूफानों के दौरान होने वाला नुकसान भी पहले से ज्यादा बढ़ सकता है।&nbsp;</p>

<p>UN रिपोर्ट यह भी कहती है कि मुंबई जैसे शहरों में बढ़ता समुद्री जलस्तर ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और सैनिटेशन जैसे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट में मुंबई को सिर्फ एक तटीय शहर नहीं, बल्कि उन बड़े महानगरों में गिना गया है जिन्हें आने वाले दशकों में सबसे ज्यादा तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है.मुंबई को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्टें चिंता जता चुकी हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की क्लाइमेट एक्शन प्लान रिपोर्ट में भी समुद्र के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन के असर का जिक्र किया गया था।&nbsp;</p>

<p><strong>UN को अचानक इतनी चिंता क्यों हुई?</strong><br />
दरअसल समुद्र अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्री जलस्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा था. लेकिन 2024 में यह बढ़ोतरी 5.9 मिलीमीटर रही, जो रिकॉर्ड स्तर है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2100 तक कम से कम 0.5 मीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है. वहीं कुछ रिसर्च में यह बढ़ोतरी 2 मीटर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।&nbsp;</p>

<p><strong>सिर्फ मुंबई नहीं, दुनिया के सैकड़ों शहरों पर खतरा</strong><br />
UN रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की करीब 77 करोड़ आबादी ऐसे तटीय इलाकों में रहती है जो ऊंचे ज्वार के स्तर से 5 मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं. रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विशेष रूप से जिक्र किया गया है.इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहने वाला. दुनिया के कई बड़े तटीय शहरों और निचले इलाकों को भी आने वाले सालों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. रिपोर्ट में न्यूयॉर्क, मियामी और चीन के ग्वांगझोउ जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां सबसे बड़ा खतरा अरबों डॉलर की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का है, जबकि दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी चिंता लोगों के घर और आबादी का पलायन है।&nbsp;</p>
]]></content>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कटेंगे DL पॉइंट; बार-बार गलती की तो लाइसेंस होगा सस्पेंड या रद्द]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/nitin-gadkaris-major-announcement-dl-points-to-be-deducted-for-traffic-violations-license-to-be-suspended-or-cancelled-for-repeated-offenses-0001518633/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:00:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[Yes]]></featured>
<description><![CDATA[नई दिल्ली

भारत में जल्द ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को लेकर नियम बदल सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय DL और RC के लिए एक ग्रेडेड...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_123.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>

<p>भारत में जल्द ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को लेकर नियम बदल सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय DL और RC के लिए एक ग्रेडेड पॉइंट्स सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है. इससे बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में ड्राइवर को इनाम देने का भी प्रावधान होगा. ये इनाम उनको दिया जाएगा जो जिम्मेदारी से गाड़ी चलाते हैं और <strong>जिनका ड्राइविंग रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहता है।&nbsp;</strong></p>

<p><strong>क्या है प्रस्ताव?</strong><br />
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के 66वें सालाना सम्मेलन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को सीधे ड्राइविंग लाइसेंस के रिकॉर्ड से जोड़ेगा।&nbsp;</p>

<p>उन्होंने आगे कहा, &quot;मेरा मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है.&quot; इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स काटे जाएंगे. इसमें जैसे ही पेनाल्टी एक तय सीमा (थ्रेशोल्ड) तक पहुंचेगी, प्रशासन लाइसेंस धारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा. गडकरी ने कहा, &quot;हर नियम उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स कटेंगे. इसके अलावा एक तय लिमिट के बाद लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल भी हो जाएगा।&nbsp;</p>

<p><strong>जिम्मेदार ड्राइवर्स को मिलेंगे रिवॉर्ड्स</strong><br />
प्रस्तावित व्यवस्था केवल सजा या पेनाल्टी तक ही सीमित नहीं है. गडकरी ने कहा कि अच्छे ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले वाहन चालकों को फायदे दिए जा सकते हैं. जिसमें संभवतः इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव्स भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन संभावित इंसेंटिव्स के रूपरेखा को लेकर अभी जानकारी नहीं दी गई है।&nbsp;</p>

<p><br />
पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम सिर्फ एक बार चालान भरने के मुकाबले ड्राइविंग के पूरे रिकॉर्ड पर लगातार नजर रखेगा. आसान भाषा में ऐसे समझें बार-बार ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना या खतरनाक ड्राइविंग जैसे मामलों को अलग-अलग घटना मानने के बजाय एक साथ जोड़कर देखा जाएगा. जिससे लाइसेंस को रिव्यू किया जा सकेगा।&nbsp;</p>

<p><strong>ड्राइवर के बिहेवियर पर भी फोकस<br />
गडकरी ने कहा कि भारत में रोड सेफ्टी </strong>को बेहतर बनाने के प्रयासों में चालकों का व्यवहार (ड्राइवर बिहेवियर) सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा, &quot;ड्राइवरों का बर्ताव एक बड़ी समस्या है. अब हम इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं।&nbsp;</p>

<p>उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उन्हें अपने गलत रवैये के नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, &quot;हम लगातार गलतियां करते हैं और फिर सीखते हैं, यह सही नहीं होगा. हमें ऐसे लोगों पर सख्ती करनी होगी जहां उनकी गलतियां ही हादसों और नतीजों के लिए जिम्मेदार होती हैं।&nbsp;</p>

<p>इस प्रस्ताव पर बड़े स्तर पर सड़क-सुरक्षा पहलों के साथ चर्चा की गई. इसमें Bharat NCAP 2.0 भी शामिल है, जिसे गडकरी ने अक्टूबर 2027 के लिए प्लान बताया है. व्हीकल-सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के अगले फेज में केवल क्रैश परफॉर्मेंस ही नहीं, बल्कि सेफ्टी से जुड़ी पूरी चेन पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।&nbsp;</p>

<p><strong>बाइक टैक्सी सर्विस पर भी जोर</strong><br />
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी घोषणा की कि प्राइवेट मोटरसाइकिल मालिकों को बाइक टैक्सी सर्विस चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने राज्य सरकारों को इन सर्विसेज को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने बताया कि इस पहल से लगभग आठ करोड़ लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।&nbsp;</p>
]]></content>
<guid>https://ujjwalpradesh.in/news/nitin-gadkaris-major-announcement-dl-points-to-be-deducted-for-traffic-violations-license-to-be-suspended-or-cancelled-for-repeated-offenses-0001518633/</guid>
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</item>
<item>
<title><![CDATA[Zorawar से अंडरवाटर रोबोट तक, बेल्जियम की ये 4 तकनीकें बढ़ाएंगी भारत की सैन्य ताकत]]></title>
<link>https://ujjwalpradesh.in/news/from-the-zorawar-to-underwater-robots-these-4-belgian-technologies-will-boost-indias-military-might-0001518621/</link>
<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:00:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[देश]]></category>
<featured><![CDATA[Yes]]></featured>
<description><![CDATA[नई दिल्ली

सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों...]]></description>
<img><![CDATA[https://ujjwalpradesh.in/uploads/news/202609/4A_106.jpg]]></img>
<content><![CDATA[<p>नई दिल्ली</p>

<p>सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्&zwj;तार में बताते हैं।&nbsp;</p>

<p><strong>कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा?</strong></p>

<p><strong>1. जोरावर टैंक का &lsquo;हेड&rsquo; (John Cockerill 3105 Turret)</strong></p>

<p>सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा।&nbsp;</p>

<p>&bull; पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा।&nbsp;</p>

<p><strong>2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket)</strong><br />
&bull; सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा.<br />
&bull; पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह &lsquo;मेड इन इंडिया&rsquo; बनने लगेगा।&nbsp;</p>

<p><strong>3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper)</strong><br />
&bull; सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स.<br />
&bull; पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा।&nbsp;</p>

<p><strong>4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachauss&eacute;e):</strong><br />
&bull; सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली.<br />
&bull; पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा।&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>

<table>
	<tbody>
		<tr>
			<th>वेपन / टेक</th>
			<th>पार्टनर कंपनी</th>
			<th>क्या है खास बात?</th>
			<th>असली काम कहाँ आएगा?</th>
		</tr>
	</tbody>
	<tbody>
		<tr>
			<td><strong>3105 टैंक टरेट</strong></td>
			<td>John Cockerill</td>
			<td>105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेट</td>
			<td>जोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती)</td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>70mm लेजर रॉकेट</strong></td>
			<td>Thales Belgium</td>
			<td>स्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंज</td>
			<td>प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए</td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>अंडरवाटर रोबोट्स</strong></td>
			<td>Exail Robotics</td>
			<td>300m गहराई में माइन्स ढूंढेगा</td>
			<td>इंडियन नेवी के जहाजों हेतु</td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>एम्युनिशन फैक्ट्री</strong></td>
			<td>New Lachauss&eacute;e</td>
			<td>10 करोड़ राउंड्स/साल</td>
			<td>आर्मी के लिए गोलियों का बैकअप</td>
		</tr>
	</tbody>
</table>

<p><strong>बॉटम लाइन</strong><br />
<strong>1. नो मोर इंपोर्ट: </strong>भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा.</p>

<p><strong>2. चीन-पाक हैरान:</strong> पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं.</p>

<p><strong>3. फ्यूचर एक्सपोर्ट:</strong> आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा.</p>

<p><strong>सवाल-जवाब</strong></p>

<p><strong>1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है?</strong></p>

<p>10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है.</p>

<p><strong>2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है?</strong></p>

<p>बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल &lsquo;टरेट&rsquo; (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा.</p>

<p><strong>3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं?</strong></p>

<p>अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है.</p>

<p><strong>4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है?</strong></p>

<p>नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे.</p>

<p><strong>5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है?</strong></p>

<p>हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.</p>

<p>&nbsp;</p>

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<title><![CDATA[घर में दुकान-कॉम्प्लेक्स चलाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल की 576 कॉलोनियों पर होगी कार्रवाई]]></title>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:00:00 GMT</pubDate>
<category><![CDATA[धर्म ज्योतिष]]></category>
<featured><![CDATA[Yes]]></featured>
<description><![CDATA[भोपाल

भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक...]]></description>
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<content><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong></p>

<p>भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है।</p>

<p><strong>सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां<br />
पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्ता</strong>निया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है।</p>

<p><strong>हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति</strong><br />
हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है।</p>

<p>निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- <strong>कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त</strong></p>

<p><strong>घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन</strong><br />
जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया।</p>

<p><strong>ट्रैफिक पर पड़ेगा असर</strong><br />
इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।</p>
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